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ट्रंप के बाद पुतिन का दौरा और रूस-चीन की ‘अटूट’ धुरी

मई 2026 का महीना वैश्विक कूटनीति के लिए बेहद हलचल भरा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा के ठीक चार दिन बाद, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 19 मई को बीजिंग पहुंचकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक स्पष्ट संदेश दिया है: मॉस्को और बीजिंग का गठबंधन पहले से कहीं अधिक मजबूत है।

ट्रंप के दौरे के बाद पुतिन की एंट्री

13 से 15 मई 2026 तक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और चीन के बीच बिगड़े संबंधों में स्थिरता लाना था। ट्रंप की यात्रा के ठीक बाद पुतिन का यह 25वां चीन दौरा इस बात का प्रमाण है कि चीन ‘संतुलन की कूटनीति’ (Balancing Diplomacy) का खेल कितनी कुशलता से खेल रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि शी जिनपिंग यह संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका, बीजिंग को अलग-थलग नहीं कर सकता क्योंकि उनके पास रूस जैसा एक ठोस और भरोसेमंद सहयोगी मौजूद है।

एजेंडा: ‘पावर ऑफ साइबेरिया 2′ पाइपलाइन

पुतिन की इस दो-दिवसीय यात्रा का मुख्य केंद्र बिंदु आर्थिक और ऊर्जा सहयोग है, विशेष रूप से पावर ऑफ साइबेरिया 2′ (Power of Siberia 2) प्राकृतिक गैस पाइपलाइन।

  • परियोजना क्या है: यह 2,600 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन रूस के पश्चिमी साइबेरियाई गैस क्षेत्रों को मंगोलिया के रास्ते चीन से जोड़ेगी।
  • रणनीतिक महत्व: यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी बाजारों से कटे रूस के लिए चीन अब ऊर्जा का सबसे बड़ा ग्राहक है। मॉस्को इस पाइपलाइन को अपनी आर्थिक जीवनरेखा के रूप में देखता है, जबकि चीन इसे अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के लिए एक सुरक्षित, भूमि-आधारित विकल्प मानता है।
  • चुनौतियां: हालांकि दोनों देश इसे प्राथमिकता दे रहे हैं, लेकिन गैस की कीमतों को लेकर लंबे समय से जारी विवाद और अनुबंध की शर्तों पर सहमति अभी भी एक बाधा बनी हुई है।

एक ‘असममित’ (Asymmetrical) गठबंधन

सार्वजनिक रूप से दोनों नेता इसे “अनंत मित्रता” कहते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे की सच्चाई यह है कि संबंधों का संतुलन बदल गया है। 2022 के बाद से रूस, आर्थिक रूप से बीजिंग पर अत्यधिक निर्भर हो गया है। आज चीन, प्रतिबंधित रूसी तेल का प्राथमिक खरीदार है, जो शी जिनपिंग को वार्ता की मेज पर एक कमांडिंग पोजिशन देता है।

निष्कर्ष

पुतिन की यह यात्रा केवल एक शिष्टाचार मुलाकात नहीं है; यह एक संदेश है कि दुनिया एक ‘बहुध्रुवीय’ (Multipolar) दिशा में आगे बढ़ रही है। जहाँ ट्रंप का दौरा व्यापारिक स्थिरता की कोशिश था, वहीं पुतिन का दौरा रूस और चीन के बीच एक रणनीतिक और ऊर्जा-केंद्रित ‘ब्लॉक’ को मजबूती देने की कवायद है।

यह यात्रा 2026-2027 के ‘रूस-चीन शिक्षा वर्ष’ के उद्घाटन के साथ समाप्त होगी, जो दोनों देशों के बीच केवल सैन्य या आर्थिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को गहरा करने का भी प्रयास है।

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