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वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों के दबाव में पेट्रोल-डीजल फिर हुए महंगे

नई दिल्ली: यदि आपने आज सुबह अपनी गाड़ी में पेट्रोल भरवाया है, तो निश्चित रूप से आपकी जेब पर बोझ बढ़ा होगा। एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार, सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने देशभर में ईंधन की कीमतों में आक्रामक बढ़ोतरी की है। मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई है।

यह ताजा बढ़ोतरी शुक्रवार को हुई ₹3 प्रति लीटर की भारी वृद्धि के बाद आई है। मात्र पांच दिनों में आम उपभोक्ताओं को प्रति लीटर ₹4 तक ज्यादा भुगतान करना पड़ रहा है।

दिल्ली में पेट्रोल-डीजल की नई दरें:

  • पेट्रोल: 87 पैसे की बढ़ोतरी ➔ ₹98.64 / लीटर
  • डीजल: 91 पैसे की बढ़ोतरी ➔ ₹91.58 / लीटर

कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

इसका सीधा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतें हैं। भारत अपनी अधिकांश तेल जरूरतों का आयात करता है, और वर्तमान में ब्रेंट क्रूड $100 से $110 प्रति बैरल के बीच कारोबार कर रहा है। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में कमजोरी से भी आयात महंगा हो गया है।

क्या कोई सरकारी राहत मिलेगी?

सरकार ने सोमवार को ही यह स्पष्ट कर दिया है कि तेल कंपनियों के लिए कोई ‘बेलआउट’ पैकेज नहीं दिया जाएगा। यानी कंपनियों को अपनी लागत वसूलने के लिए खुदरा कीमतों को ही बाजार के अनुसार समायोजित करना होगा।

क्रमबद्ध बढ़ोतरी की रणनीति

तेल कंपनियां एक बार में बड़ी कीमतों की बढ़ोतरी के ‘शॉक’ से बचने के लिए ‘क्रमबद्ध’ (Graded) तरीका अपना रही हैं। ICRA लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ के अनुसार, कंपनियां छोटी-छोटी बढ़ोतरी कर रही हैं ताकि उपभोक्ताओं को एक साथ बड़ा झटका न लगे। वर्तमान में कंपनियों को हो रहा दैनिक घाटा अस्थिर है, इसलिए कीमतें बढ़ाना उनकी मजबूरी है।”

क्या आगे और बढ़ेगी महंगाई?

जानकारों का मानना है कि मंगलवार की 90 पैसे की बढ़ोतरी अंतिम नहीं है। जब तक कच्चा तेल $105-$110 प्रति बैरल के स्तर पर बना रहेगा, तब तक तेल कंपनियां अपने दैनिक घाटे (करीब ₹450 करोड़) को कम करने के लिए आने वाले हफ्तों में और छोटी-छोटी बढ़ोतरी कर सकती हैं।

2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी हमने इसी तरह की ‘स्टैगरड’ (staggered) बढ़ोतरी देखी थी। बिना सरकारी सब्सिडी के, अब भारतीय उपभोक्ताओं को तेल की कीमतों में लगातार हो रहे इन सूक्ष्म बदलावों के लिए खुद को तैयार रखना होगा।

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