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अमेरिकी सीनेट ने ईरान के खिलाफ ट्रम्प की युद्ध रणनीति को नकारा

ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर अमेरिका में राजनीतिक रस्साकशी और तेज हो गई है। अमेरिकी सीनेट ने एक कड़े मुकाबले वाले 50-48 के वोट से एक समवर्ती प्रस्ताव (Concurrent Resolution) पारित किया है, जिसमें मांग की गई है कि जब तक कांग्रेस (अमेरिकी संसद) स्पष्ट रूप से सैन्य कार्रवाई को मंजूरी नहीं देती, तब तक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिकी सेना को ईरान के साथ जारी शत्रुता से दूर रखें।

यह कदम ऐसे समय में आया है जब व्हाइट हाउस तेहरान के साथ जिनेवा में $300 अरब डॉलर के एक नाजुक रूपरेखा समझौते (Framework Agreement) को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहा है।

“समवर्ती प्रस्ताव” की कानूनी संरचना

इस वोट की टाइमिंग भले ही बहुत बड़ा राजनीतिक संदेश देती हो, लेकिन इसके वास्तविक कानूनी प्रभाव को लेकर तीखी संवैधानिक बहस जारी है। संसद ने संयुक्त प्रस्ताव के बजाय एक समवर्ती प्रस्ताव पारित करना चुना, जिसके कारण इसकी कार्यप्रणाली अलग है:

  • राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की जरूरत नहीं: यह प्रस्ताव हस्ताक्षर या वीटो के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प के पास नहीं जाता है। यह सीधे कार्यपालिका (Executive Branch) को बायपास करता है।
  • विवादित कानूनी शक्ति: ऐतिहासिक रूप से, समवर्ती प्रस्तावों का उपयोग संसद की “भावना या राय” व्यक्त करने के लिए किया जाता है। हालांकि यह आधिकारिक रूप से संसद के दोनों सदनों को इस युद्ध के खिलाफ खड़ा करता है, लेकिन व्हाइट हाउस का तर्क है कि ऐसे प्रस्तावों में बाध्यकारी कानूनी शक्ति की कमी होती है।
  • वीटो का इतिहास: अपने पहले कार्यकाल के दौरान, ट्रम्प ने क्रमशः यमन (2019) और ईरान (2020) के संबंध में युद्ध शक्तियों के विधेयकों (War Powers Bills) को सफलतापूर्वक वीटो कर दिया था क्योंकि कांग्रेस के पास वीटो को पलटने के लिए दो-तिहाई बहुमत नहीं था। इस बार समवर्ती प्रस्ताव का उपयोग करके, संसद ने वीटो की लड़ाई से तो खुद को बचा लिया है, लेकिन इसके कानूनी प्रवर्तन (enforcement) को एक संवैधानिक अधर में छोड़ दिया है।

1973 का युद्ध शक्तियां अधिनियम बनाम राष्ट्रपति के विशेषाधिकार

इस टकराव के केंद्र में 1973 का युद्ध शक्तियां अधिनियम (War Powers Act of 1973) है, जो वियतनाम युद्ध के बाद बनाया गया एक कानून है जिसका उद्देश्य राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों पर अंकुश लगाना है।

  • 60 दिनों की समय-सीमा: इस कानून के तहत, राष्ट्रपतियों को अमेरिकी सेना को किसी भी युद्ध या शत्रुता में भेजने के 60 दिनों के भीतर कांग्रेस से औपचारिक मंजूरी लेनी होती है।
  • व्हाइट हाउस का रुख: व्हाइट हाउस और दोनों ही राजनीतिक दलों (डेमोक्रेट और रिपब्लिकन) के प्रशासन अक्सर इस बात पर विवाद करते आए हैं कि यह कानून कैसे लागू होता है। वर्तमान व्हाइट हाउस का तर्क है कि ईरान में युद्ध छेड़ने की ट्रम्प की शक्तियों को सीमित करने वाले ऐसे प्रस्ताव पूरी तरह से असंवैधानिक हैं।

इस प्रस्ताव का व्यापक क्षेत्रीय संदर्भ

भले ही यह प्रस्ताव मुख्य रूप से प्रतीकात्मक हो, लेकिन यह उस युद्ध के प्रति अमेरिकी संसद के गहरे असंतोष को दर्शाता है जिसने पूरे वैश्विक परिदृश्य को प्रभावित किया है:

  • यह संघर्ष फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के साथ शुरू हुआ था।
  • इसने वैश्विक ऊर्जा बाजारों (ग्लोबल एनर्जी मार्केट्स) को बुरी तरह हिलाकर रख दिया।
  • इसके चलते लेबनान और खाड़ी देशों को शामिल करते हुए एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रास्ता खुल गया।

ट्रम्प की तीखी प्रतिक्रिया: “गलत समय पर लिया गया और अर्थहीन फैसला”

राष्ट्रपति ट्रम्प ने बाद में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर इस वोट की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे “गलत समय पर लिया गया और अर्थहीन” (poorly timed and meaningless) करार दिया।

ट्रम्प ने अपनी पोस्ट में लिखा: “इन सीनेटरों ने अभी-अभी मेरा काम और मुश्किल कर दिया है, लेकिन मैं इसे किसी न किसी तरह पूरा कर लूंगा, क्योंकि मैं हमेशा काम पूरा करता हूं!”

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