अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासन ने भारत के साथ कृषि सहयोग बढ़ाने की जताई इच्छा
विदेश मंत्रालय (MEA) ने रविवार को जानकारी दी कि अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासन ने भारत के साथ कृषि व्यापार, बुनियादी ढांचे के विकास और सिंचाई जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की है।
प्रमुख बिंदु (Key Highlights)
- छह दिवसीय यात्रा: विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह चर्चा तालिबान प्रशासन के कृषि, सिंचाई और पशुधन मंत्री अताउल्लाह उमरी (Ataullah Omari) की छह दिवसीय भारत यात्रा के दौरान हुई, जो रविवार को संपन्न हुई।
- चर्चा के मुख्य विषय:
- मूल्य संवर्धन (Value Addition) के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) में सहयोग।
- क्षमता निर्माण (Capacity Building)।
- कृषि और खाद्य उत्पादों में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना।
महत्वपूर्ण बैठकें
अपनी यात्रा के दौरान अफगान प्रतिनिधिमंडल ने कई भारतीय मंत्रियों और प्रमुख संस्थानों के साथ बैठकें कीं:
- केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात:
- शिवराज सिंह चौहान (कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री)
- चिराग पासवान (खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री)
- पवित्र मार्गेरिटा (विदेश राज्य मंत्री)
- प्रमुख संस्थानों और व्यापारिक संगठनों से चर्चा:
- राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD)
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
- भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI)
- फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI)
- पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI)
कूटनीतिक संबंध और मानवीय सहायता
- राजनयिक स्थिति: भारत ने काबुल में तालिबान प्रशासन को अभी तक औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है, हालांकि काबुल स्थित भारतीय दूतावास में अपनी ‘तकनीकी टीम’ का स्तर बढ़ाकर ‘चार्ज डी अफेयर्स’ (Chargé d’affaires) कर दिया है।
- मानवीय सहायता: आवश्यक वस्तुओं और जीवन रक्षक दवाओं की कमी से जूझ रहे अफगानिस्तान को भारत लगातार भोजन, दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुएं भेज रहा है।
- मार्ग में बाधा: इस मानवीय सहायता का एक बड़ा हिस्सा ईरान के चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) के माध्यम से भेजा जा रहा था, लेकिन ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण यह मार्ग बाधित हुआ है।
