दुनिया

भारत-नीदरलैंड ‘रणनीतिक साझेदारी’

हाल ही में भारत और नीदरलैंड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) के स्तर पर उन्नत किया है। इस यात्रा के दौरान जहां एक ओर 17 प्रमुख आर्थिक और तकनीकी समझौते हुए, वहीं दूसरी ओर नागरिक स्वतंत्रता और एक हाई-प्रोफाइल वाणिज्यिक/दूतावास संबंधी विवाद पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक मतभेद भी सतह पर आए।

यात्रा की मुख्य विशेषताएं और समझौते

  • रणनीतिक उन्नयन: दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रूप से ‘रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा दिया गया।
  • 17 प्रमुख समझौते: सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज (critical minerals) और पारंपरिक “WAH” (Water, Agriculture, Health) क्षेत्रों में 17 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए।
  • सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बड़ी सफलता: भारत के टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (TATA Electronics) और डच तकनीकी दिग्गज एएसएमएल (ASML) के बीच एक सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन परियोजना के लिए ऐतिहासिक समझौता हुआ। एएसएमएल (ASML) एक्सट्रीम अल्ट्रावायलेट (EUV) लिथोग्राफी मशीनरी में वैश्विक एकाधिकार रखती है, जो उन्नत चिप निर्माण के लिए अनिवार्य है।
  • यूरोपीय दौरा: इस सफल बैठक के बाद, पीएम मोदी अपने पांच देशों के यूरोपीय दौरे के अगले पड़ाव के तहत रविवार को स्वीडन और सोमवार को नॉर्वे (तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए) रवाना हुए।

कूटनीतिक मतभेद और भारत का कड़ा रुख

इस यात्रा के दौरान आर्थिक सहयोग के साथ-साथ दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच वैचारिक और संस्थागत मतभेद भी देखने को मिले:

1. नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों पर बहस

  • नीदरलैंड का पक्ष: नवनिर्वाचित डच प्रधानमंत्री रॉब जेटन (Rob Jetten) ने सार्वजनिक रूप से कहा कि इस रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से दोनों देशों को संवेदनशील विषयों पर बात करने के अधिक अवसर मिलेंगे। उन्होंने यूरोपीय संघ (EU) की ओर से भारत में प्रेस स्वतंत्रता और मुस्लिम समुदाय सहित अन्य अल्पसंख्यक अधिकारों के संरक्षण को लेकर चिंता व्यक्त की।
  • भारत का तीखा खंडन (Pushback): विदेश मंत्रालय (MEA) के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने डच मीडिया (जैसे NRC समाचार पत्र) के सवालों का कड़ा जवाब देते हुए कहा:

“यह सवाल भारत के प्रति समझ की कमी’ के कारण पैदा होता है। आज हम 1.4 अरब लोग हैं, जो अत्यधिक विविधता के बावजूद शांति और सद्भाव से रह रहे हैं। भारत एक जीवंत लोकतंत्र है जहां शांतिपूर्ण ढंग से सत्ता का हस्तांतरण होता है। भारत को समझने और उसकी सराहना करने के लिए आपको उसे और करीब से जानने की जरूरत है।”

  • मंत्रालय का स्पष्टीकरण: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बाद में स्पष्ट किया कि डच पीएम ने इन मानवाधिकार और राजनीतिक मुद्दों को केवल यूरोपीय मीडिया के सामने उठाया, जबकि औपचारिक बंद कमरे की द्विपक्षीय वार्ताओं में इन पर कोई चर्चा नहीं हुई थी।

2. इंसिया अंतर्राष्ट्रीय बाल अपहरण मामला (Insiya Case)

  • डच नेतृत्व ने राजनयिक स्तर पर इंसिया अपहरण मामले’ को औपचारिक रूप से उठाया। यह 2016 का एक हाई-प्रोफाइल सीमा पार बाल अभिरक्षा (child custody) विवाद है, जिसमें डच मूल की एक बच्ची को उसके पिता द्वारा कथित तौर पर अवैध रूप से भारत लाया गया था।
  • भारत ने इस पर रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि यह मामला भारतीय न्यायपालिका के समक्ष विचाराधीन (sub judice) है, इसलिए इसमें कार्यपालिका (executive) सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

भारत-नीदरलैंड संबंधों का भविष्य और महत्व

यह रणनीतिक elevation (उन्नयन) पश्चिमी यूरोप की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वे अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं (supply chains) को किसी एक देश (जैसे चीन) पर निर्भर रखने के बजाय विविध बनाना चाहते हैं। भारत-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता के लिए नीदरलैंड भारत को एक मजबूत और विश्वसनीय स्तंभ मानता है। टाटा और एएसएमएल का यह सौदा भारत के ‘राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मिशन’ को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *