नया ग्रेट गेम: चीन के ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ एकाधिकार को तोड़ने के लिए भारत, अमेरिका और क्वाड की पहल
Table of Contents
यदि आप वैश्विक प्रौद्योगिकी के भविष्य को समझना चाहते हैं, तो इस सप्ताह आयोजित 11वीं क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के इतर हुए घटनाक्रमों पर नज़र डालिए। मंगलवार के घटनाक्रमों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक बड़े बदलाव का संकेत दिया है: भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ के मामले में एक स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाया है।
स्मार्टफोन से लेकर लड़ाकू विमानों तक—हर चीज़ के लिए आवश्यक माने जाने वाले दुर्लभ मृदा तत्वों (Rare Earth Elements) और रणनीतिक धातुओं पर चीन के प्रतिबंधात्मक निर्यात नियंत्रणों को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ गई हैं। इन अनिश्चिता के बीच, नई दिल्ली और वाशिंगटन अपनी खुद की आपूर्ति लाइनों को सुरक्षित करने के लिए आक्रामक रूप से आगे बढ़ रहे हैं।
द्विपक्षीय प्रयास: “आपूर्ति सुरक्षित करना”
हाल ही में, ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ पर हुए समझौते को आधिकारिक तौर पर “क्रिटिकल मिनरल्स और दुर्लभ मृदा तत्वों के खनन और प्रसंस्करण में आपूर्ति सुरक्षित करना” (Securing of supply in the mining and processing of critical minerals and rare earths) नाम दिया गया है। यह केवल एक सम्झौता पत्र नहीं है, बल्कि एक व्यावहारिक कार्ययोजना है।
यह ढांचा (फ्रेमवर्क) स्पष्ट रूप से आपूर्ति श्रृंखला की प्रत्येक कड़ी को लक्षित करता है:
- खनन और प्रसंस्करण (Mining & Processing): कच्चे माल के निष्कर्षण (raw extraction) और शोधन (refinement) में समन्वित निवेश।
- रीसाइक्लिंग (Recycling): ई-कचरे (e-waste) और स्क्रैप से महत्वपूर्ण धातुओं को पुन: प्राप्त (recover) करने के लिए उन्नत क्षमताओं का विकास।
- वित्तपोषण (Financing): इन पूंजी-गहन (capital-intensive) परियोजनाओं को वित्तपोषित करने के लिए संयुक्त सहयोग।
यह समझौता रातोंरात नहीं हुआ है। यह फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाशिंगटन यात्रा के दौरान रखी गई उच्च स्तरीय राजनयिक नींव का परिणाम है, जहां सुरक्षित खनिज मार्गों को एक “साझा रणनीतिक प्राथमिकता” के रूप में रेखांकित किया गया थी। यह इस साल 20 फरवरी, 2026 को अमेरिका के नेतृत्व वाले ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) इनिशिएटिव में भारत के शामिल होने के फैसले को भी आगे बढ़ाता है।
क्वाड का 20 अरब डॉलर का रणनीतिक कोष
भारत-अमेरिका द्विपक्षीय समझौते से अलग, व्यापक क्वाड गठबंधन (ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका) ने अपनी एक और बड़ी पहल का अनावरण किया। ये चारों देश एक ऐसा ढांचा स्थापित कर रहे हैं जिसे सरकारी और निजी क्षेत्र के मिश्रित सहयोग से लगभग 20 अरब डॉलर जुटाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इसका उद्देश्य क्या है?
उन महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाओं को बढ़ावा देना और विकसित करना जो विशेष रूप से क्वाड देशों के भीतर स्थित हैं और जिनका संचालन इन सहयोगी देशों में मुख्यालय वाली कंपनियों द्वारा किया जाता है।
यह 2025 के बाजार के झटकों की एक सीधी प्रतिक्रिया है, जब अमेरिका द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ के बाद बीजिंग ने दुर्लभ मृदा तत्वों के निर्यात को कम कर दिया था।
अमेरिका केवल बातें नहीं कर रहा है; वह अभूतपूर्व रूप से अत्यधिक पूंजी भी लगा रहा है। अमेरिकी दूतावास के अनुसार, वाशिंगटन पहले से ही ऋण और निवेश के रूप में 30 अरब डॉलर से अधिक की राशि विभिन्न परियोजनाओं में लगा रखा है। यह घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों प्रयासों तक विस्तृत है, जो आर्थिक प्रतिस्पर्धा को सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ता है।
नियमों का सामंजस्य और ‘अर्बन माइनिंग’
इन ढांचों को जो चीज़ वास्तव में व्यावहारिक और प्रभावी बनाती है, वह है नियामक संरेखण (regulatory alignment) के प्रति प्रतिबद्धता। द्विपक्षीय और क्वाड-स्तरीय दोनों समझौते सीमा पार निवेश और आपूर्ति श्रृंखला तक पहुंच को आसान बनाने के लिए घरेलू कानूनों के सामंजस्य पर जोर देते हैं। इसके साथ ही इस समझौते के प्रावधान अवरोध को दूर रखने के लिए सुरक्षा नियंत्रणों को कड़ा करने का भी प्रावधान करता हैं।
इसमें सबसे महत्वपूर्ण तथ्य क्वाड ‘अर्बन माइनिंग’ है। ‘अर्बन माइनिंग’ से तात्पर्य ई-कचरे से महत्वपूर्ण खनिजों को पुन: प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित करना। भागीदार देशों के भीतर मौजूदा अपशिष्ट सामग्रियों के रीसाइक्लिंग को प्राथमिकता देकर, यह गठबंधन एक ऐसी बंद-लूप प्रणाली (closed-loop system) बनाने के लिए काम कर रहा है जो नए सिरे से होने वाले पारंपरिक खनन पर निर्भरता को पूरी तरह से कम कर दे।
‘क्रिटिकल मिनरल्स’ में एकध्रुवीय प्रभुत्व (unipolar dominance) के युग को चुनौती दी जा रही है। ताकि तकनीकी आपूर्ति श्रृंखलाओं (tech supply chains) के लिए, वैश्विक मानचित्र को आधिकारिक तौर पर फिर से पुनः परिभाषित किया जा सके तथा ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ की आपूर्ति को लगातार सुनिश्चित किया जा सके।
