क्वाड का शंखनाद: हिंद-प्रशांत के अशांत जलक्षेत्र के लिए एक नया सुरक्षा ढांचा
Table of Contents
इस सप्ताह की क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक की मुख्य सुर्खियां ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ पर समझौता है, लेकिन जो तथ्य सभी के ध्यान से बच गया वह है भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के गठबंधन ने राजनयिक वार्ताओं से आगे बढ़कर व्यावहारिक समुद्री रणनीति (Operational Maritime Strategy) की ओर रुख किया है।
हैदराबाद हाउस के लॉन से विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा दिया गया संदेश स्पष्ट और अकाट्य था: हिंद-प्रशांत में मूकदर्शक बने रहने का दौर अब समाप्त हो चुका है।
समुद्री सुरक्षा का विस्तार
क्वाड ने दो प्रमुख सुरक्षा ढांचों की घोषणा की, जो अनिवार्य रूप से चारों देशों की नौसेना और तट रक्षक बालों की संपत्तियों को एकीकृत ग्रिड में पिरोते हैं:
- हिंद-प्रशांत समुद्री निगरानी सहयोग (Indo-Pacific Maritime Surveillance Collaboration): यह पहल चारों देशों की निगरानी क्षमताओं को एक नेटवर्क से जोड़ती है, जिससे समुद्री यातायात की निगरानी करने और आपातकालीन संचालन में समन्वय स्थापित करने के लिए पूरे क्षेत्र में एक निर्बाध, खुफिया जानकारी साझा करने वाला सुरक्षा कवच तैयार होता है।
- समुद्री डोमेन जागरूकता (Maritime Domain Awareness) का विस्तार: पिछले प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए, यह अब पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोगी देशों को वाणिज्यिक जहाजों की ट्रैकिंग का लगभग वास्तविक समय (नियर रियल-टाइम) का डेटा प्रदान करेगा।
यदि कोई जहाज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अपनी लोकेशन छिपाता है (“डार्क” हो जाता है) या आक्रामक व्यवहार करता है, तो क्वाड को अब लगभग तुरंत इसका पता चल जाएगा—और वह इस डेटा को क्षेत्रीय भागीदारों के साथ साझा करेगा।
चोकपॉइंट्स: होर्मुज और दक्षिण चीन सागर
इस नौसैनिक एकीकरण का तात्कालिक कारण वैश्विक व्यापार मार्गों पर बढ़ता खतरा है। इस महीने की शुरुआत में, ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने आक्रामक रूप से दावा किया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) कोई अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग नहीं है, जिसका अर्थ यह था कि ईरान पर ‘समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय’ (UNCLOS) का पालन करने की कोई बाध्यता नहीं है।
क्वाड के संयुक्त बयान ने इस पर सीधा पलटवार किया, लाल सागर में ईरान समर्थित हौती मिलिशिया द्वारा वाणिज्यिक जहाजों पर हाल के हमलों की निंदा की और होर्मुज तथा दक्षिण चीन सागर दोनों में ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्र के कानून पर संधि’ (UNCLOS) के पूर्ण पालन की मांग की।
“सुरक्षित और बेरोकटोक समुद्री वाणिज्य” की आवश्यकता पर श्री जयशंकर की टिप्पणियों को ध्यान देने योग्य हैं। उन्होंने न केवल सतही निगरानी बल्कि समुद्र के नीचे के केबल और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में बढ़ते सहयोग का उल्लेख किया। क्वाड एक ऐसी दुनिया के लिए तैयारी कर रहा है जहां महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे—भौतिक और डिजिटल दोनों—को विभिन्न देशों (स्टेट एक्टर्स) द्वारा सक्रिय रूप से निशाना बनाया जा रहा है।
‘क्वाड एट सी’ और ऊर्जा सुरक्षा
इन समझौतों को व्यावहारिक रूप से लागू करने के लिए, विदेश मंत्री रुबियो ने घोषणा की कि भारत “क्वाड एट सी” (Quad at Sea) मिशन के अगले चरण की मेजबानी करेगा। यह अनूठी तैनाती संयुक्त संचालन के लिए चारों देशों के तट रक्षकों बलों को एक साथ लाएगी।
क्वाड देशों द्वाराअंतर-परिचालनीयता (interoperability) का एक अत्यधिक प्रतीकात्मक और व्यावहारिक प्रदर्शन होगा। इसके साथ ही, इस समूह ने हिंद-प्रशांत ऊर्जा सुरक्षा पहल (Indo-Pacific Energy Security Initiative) की शुरुआत की, जिसके माध्यम से क्षेत्रीय ऊर्जा लचीलेपन को बढ़ावा दिया जाएगा।
बीजिंग की प्रतिक्रिया
क्वाड सदस्य देशों के अधिकारियों ने सावधानी बरतते हुए कहा कि ये पहल “किसी अन्य क्षेत्रीय शक्ति को लक्षित नहीं हैं,” लेकिन इसके अंतर्निहित संदेश (subtext) को नजरअंदाज करना असंभव है। कुछ ही घंटों के भीतर, चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बीजिंग में पोडियम संभाला और “विशेष छोटे गुटों (एक्सक्लूसिव स्मॉल क्लीक्स) को बनाने” के प्रति चीन के विरोध को दोहराया।
