स्वास्थ्य

WHO का ‘इबोला प्रकोप पर अलर्ट’ के बाद केंद्र सरकार का राज्यों को मुस्तैद रहने का निर्देश

हाल ही में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में फैल रहे ‘इबोला’ प्रकोप को ‘अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल‘ घोषित कर दिया है। इस परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए, देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने और एहतियाती कदम उठाते हुए, केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश दिए हैं। राज्यों को इस बीमारी की निगरानी (disease surveillance), रैपिड रिस्पांस सिस्टम और अस्पतालों की तैयारियों को चाक-चौबंद करने को कहा गया है।

क्या भारत को इबोला प्रकोप से फिलहाल कोई खतरा है?

आइए सबसे पहले खतरे के स्तर को लेकर तस्वीर साफ कर लें कि भारत में फिलहालइबोला प्रकोप का खतरा न के बराबर है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने राज्य सरकारों को भेजे गए एक विस्तृत पत्र में साफ किया है कि संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा अभी उन अफ्रीकी देशों तक ही सीमित है जो प्रकोप वाले इलाके की सीमाओं से लगे हैं, जैसे कि दक्षिण सूडान।

हालांकि, 2020 (कोरोना महामारी) के बाद की दुनिया का सच हम सब जानते हैं। आज के ग्लोबल व्यापार और इंटरनेशनल फ्लाइट्स के दौर में किसी भी इबोला प्रकोप के वायरस सहित अन्य रोगजनक कारकों को एक देश से दूसरे देश पहुंचने में बस एक ‘फ्लाइट’ भर की देरी लगती है। ऐसे में केंद्र सरकार का यह निर्देश किसी भी खतरे के भारत पहुंचने से पहले ही ढाल तैयार कर लेने का एक बेहतरीन उदाहरण है।

सरकार का ‘डिफेंस ब्लूप्रिंट’: क्या हैं नए निर्देश?

स्वास्थ्य मंत्रालय ने इबोला प्रकोप के खतरे पर सिर्फ चेतावनी नहीं दी है; बल्कि एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। इसमें सैंपल लेने से लेकर बायोमेडिकल कचरे के निपटान तक हर चीज के लिए सख्त नियम तय किए गए हैं। राज्यों के स्वास्थ्य विभागों को इन बातों का खास ख्याल रखना होगा:

  • सख्त निगरानी (Surveillance): राज्यों को ‘एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम’ (IDSP) के तहत ट्रैकिंग तेज करनी होगी। स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश हैं कि वे बुखार के असामान्य मामलों पर पैनी नजर रखें—खासकर उन लोगों पर जो हाल ही में प्रभावित अफ्रीकी देशों से लौटकर आए हैं।
  • आइसोलेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर: राज्य प्रशासन को तुरंत ‘आइसोलेशन वार्ड’ तैयार करने और पूरी तरह से संक्रमण-मुक्त एंबुलेंस तैनात करने को कहा गया है। पीपीई (PPE) किट का पर्याप्त स्टॉक रखना और क्रिटिकल-केयर (आईसीयू) सुविधाओं को दुरुस्त करना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • रैपिड रिस्पांस टीमें: राज्य और जिला स्तर पर ‘मल्टी-डिसिप्लिनरी रैपिड रिस्पांस टीमों’ को हाई अलर्ट पर रखा जाएगा। ये टीमें किसी भी संदिग्ध मामले के सामने आते ही तुरंत मोर्चा संभालने के लिए तैयार रहेंगी।
  • अस्पतालों में सख्त प्रोटोकॉल: सभी हेल्थकेयर सेंटर्स को संक्रमण नियंत्रण के सख्त उपाय अपनाने का आदेश दिया गया है। इसमें मरीजों की स्क्रीनिंग, हाथों की साफ-सफाई और अस्पताल परिसर की कड़ी सफाई शामिल है।

टेस्टिंग की क्या है तैयारी?

इस SOP का एक सबसे अहम हिस्सा है टेस्टिंग में होने वाली देरी को रोकना। अगर कोई संदिग्ध मरीज एयरपोर्ट की स्क्रीनिंग से बचकर शहर में दाखिल हो जाता है, या किसी एंट्री पॉइंट पर पकड़ा जाता है, तो उसकी टेस्टिंग के लिए प्रोटोकॉल पहले से तय है:

  • कहाँ होगी टेस्टिंग? ICMR-NIV, पुणे (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी)
  • क्षमता: यह लैब पूरे देश से आने वाले इबोला के सभी संदिग्ध सैंपल्स की जांच करने के लिए पूरी तरह से अत्याधुनिक और सुसज्जित है।
  • तालमेल: एयरपोर्ट/बंदरगाह के स्वास्थ्य अधिकारियों और राज्य/जिला निगरानी इकाइयों के बीच सीधा और तेज संपर्क होना जरूरी है ताकि सैंपल तुरंत लैब पहुँच सके।

लक्षण: किन बातों पर रखनी है नजर? (Clinical Red Flags)

स्वास्थ्य कर्मियों को खास तौर पर इन शुरुआती लक्षणों की निगरानी करने को कहा गया है:

  • तेज़ बुखार
  • बहुत ज्यादा कमज़ोरी
  • मांसपेशियों में दर्द
  • सिरदर्द और गले में खराश
  • उल्टी और दस्त
  • पेट दर्द
  • त्वचा पर लाल चकत्ते (Rash)
  • आँखों का लाल होना

निष्कर्ष: बचाव ही बेहतरीन इलाज है

पिछले कुछ सालों में हमने एक कड़वा सच सीखा है कि वायरस और बीमारियां सरहदों को नहीं मानतीं। हालांकि, भारत और कांगो (DRC) के बीच की हजारों किलोमीटर की दूरी हमारे लिए एक प्राकृतिक ढाल का काम करती है, लेकिन हमारी असली सुरक्षा हमारे एयरपोर्ट्स के स्वास्थ्य अधिकारियों और लोकल टेस्टिंग नेटवर्क्स की सतर्कता पर ही टिकी है।

केंद्र सरकार द्वारा समय से पहले SOP लागू करना, एक मजबूत और जिम्मेदार ‘पब्लिक हेल्थ सिक्योरिटी’ की असली तस्वीर पेश करता है। आइसोलेशन प्रोटोकॉल और रैपिड रिस्पांस टीमों को अभी से एक्टिव मोड में डालकर, सरकार ने यह साफ कर दिया है कि अगर यह वायरस भारतीय जमीन पर कदम रखता भी है, तो हमारा हेल्थकेयर सिस्टम घबराहट (Panic) में नहीं, बल्कि एक फुल-प्रूफ प्लान के साथ उसका सामना करेगा।

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