मनीला में वांग यी से बातचीत में जयशंकर ने ‘बहुध्रुवीय विश्व’ की वकालत की
मनीला: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फिलीपींस की राजधानी मनीला में 59वीं आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक के इतर कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठकों में भाग लिया। चीनी विदेश मंत्री वांग यी और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय चर्चाओं के साथ-साथ क्वाड (Quad) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत ने क्षेत्रीय स्थिरता, आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता और समुद्री सुरक्षा पर अपना रुख मजबूती से रखा।
भारत-चीन संबंध: “पारस्परिक सम्मान और सीमा पर शांति”
चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बैठक में एस. जयशंकर ने जोर देकर कहा कि दो एशियाई देशों के बीच एक स्थिर संबंध वैश्विक और क्षेत्रीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है।
“हमारा मानना है कि एक स्थिर और सहयोगात्मक संबंध पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक हित और पारस्परिक संवेदनशीलता के आधार पर ही विकसित किया जा सकता है। ऐसा संबंध एक बहुध्रुवीय एशिया और एक बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण में मूल्यवान योगदान दे सकता है।” — एस. जयशंकर, विदेश मंत्री, भारत
अक्टूबर 2024 में कज़ान (Kazan) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात का जिक्र करते हुए—जहां दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए थे कि “मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए”—जयशंकर ने हाल के महीनों में संबंधों को सामान्य बनाने के लिए उठाए गए कदमों का स्वागत किया:
- सीधी वाणिज्यिक उड़ानों की बहाली और वीजा व्यवस्था में ढील।
- कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमा व्यापार की पुनरुत्थान/शुरुआत।
- मुख्य चिंताएं: जयशंकर ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता पूर्ण सामान्यीकरण के लिए पहली पूर्व-शर्त (Pre-requisite) है। साथ ही, उन्होंने भारतीय बाजार के लिए निष्पक्ष पहुंच (Fair market access) और आपूर्ति श्रृंखला की पूर्वानुमेयता (Predictability) का मुद्दा भी उठाया।
क्वाड समूह ने ‘मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत’ का दोहराया संकल्प
भारत-चीन वार्ता के बाद क्वाड समूह (ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका) के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा पर रणनीतिक चर्चा की गई।
आसियान भागीदारों के साथ जारी एक संयुक्त बयान में, मंत्रियों ने निम्नलिखित प्रतिबद्धताओं को दोहराया:
- एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मजबूत करना।
- आसियान (ASEAN) की एकता और केंद्रीयता के प्रति अटूट समर्थन।
- क्षेत्र में दीर्घकालिक समुद्री स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखना।
भारत-रूस द्विपक्षीय वार्ता: नाविकों की सुरक्षा पर जताई गंभीर चिंता
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ एक अलग द्विपक्षीय बैठक में जयशंकर ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, विज्ञान व प्रौद्योगिकी और मोबिलिटी सहित भारत-रूस साझेदारी की समीक्षा की।
हालांकि, काला सागर (Black Sea) में एक रूसी प्रक्षेप्य हमले में चार भारतीय नाविकों की मौत के बाद यह बैठक बेहद संवेदनशील थी। जयशंकर ने तनावग्रस्त क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय समुद्री कर्मियों (Seafarers) की सुरक्षा को लेकर भारत की “गंभीर चिंता” व्यक्त की।
