भारत पर अमेरिका के नए टैरिफ नियमों का स्पष्टीकरण: 45% निर्यात अतिरिक्त 10% शुल्क के दायरे से बाहर
नई दिल्ली: भारत सरकार ने शनिवार को स्थिति स्पष्ट की है कि अमेरिका को होने वाले भारत के कुल निर्यात का लगभग 45% हिस्सा नए 10% अतिरिक्त टैरिफ के दायरे से बाहर रहेगा। ध्यान रहे कि अमेरिका द्वारा जबरन श्रम (forced labour) से बने सामानों के आयात को रोकने के लिए 60 व्यापारिक साझेदारों पर स्थायी शुल्क लगाने की घोषणा की है। मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि भारत पर लगाया गया नया 10% टैरिफ, पहले प्रस्तावित 12.5% की दर से कम है।
प्रमुख छूट और मुख्य बिंदु
- शून्य अतिरिक्त शुल्क वाले उत्पाद: जेनेरिक दवाएं (generic pharmaceuticals), स्मार्टफोन और कई अन्य निर्दिष्ट उत्पाद अतिरिक्त 10% शुल्क के दायरे से बाहर हैं और इन पर शून्य अतिरिक्त ड्यूटी बनी रहेगी।
- धारा 232 के तहत आने वाले उत्पाद: अमेरिकी ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 के तहत आने वाली वस्तुएं, जैसे स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स, इस नए 10% शुल्क के अधीन नहीं होंगी।
- समान प्रतिस्पर्धा: धारा 232 के तहत 25% से 50% के बीच लगने वाले टैरिफ लगभग सभी देशों पर समान रूप से लागू होते हैं, इसलिए इससे भारत को अन्य देशों की तुलना में कोई नुकसान नहीं होगा।
- शेष 55% निर्यात: सरकार ने स्वीकार किया कि भारत के शेष 55% निर्यात पर 10% का अतिरिक्त शुल्क लगेगा, लेकिन अधिकांश अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत पर टैरिफ का कुल प्रभाव काफी कम है।
60 देशों की जांच में भारत को राहत
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के कार्यालय ने यह जांच जारी की थी कि क्या उसके व्यापारिक साझेदार जबरन श्रम से बने सामानों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठा रहे हैं।
मंत्रालय के अनुसार:
“भारत सरकार पूरी जांच के दौरान USTR के साथ लगातार संपर्क में रही। इन निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप, भारत को अंतिम उपायों के तहत अतिरिक्त टैरिफ के निचले स्तर (lower tier) में रखा गया है।”
जांच किए गए कुल 60 देशों में से 38 देशों पर भारत की तुलना में अधिक टैरिफ लगाया गया है।
कपड़ा निर्यात पर बातचीत
USTR की रिपोर्ट में बांग्लादेश, कंबोडिया, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों के लिए अमेरिकी कपास और कपड़ा उत्पादों के आयात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक ‘टैरिफ-रेट कोटा’ (Textile Mechanism) की व्यवस्था की गई है।
हालांकि भारत को इस तंत्र में सीधे शामिल नहीं किया गया है, लेकिन केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह भारतीय कपड़ा निर्यात के लिए कोटा-आधारित व्यवस्था को लेकर अमेरिकी सरकार के साथ लगातार बातचीत कर रही है।
