पिनाराई के दरवाजे पर प्रवर्तन निदेशालय की दस्तक: छापेमारी और इंडिया ब्लॉक में दरार
तिरुवनंतपुरम: केरल की राजनीतिक सरगर्मी बुधवार को चरम पर पहुंच गई, जब प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवासों पर छापेमारी की। यह छापेमारी उनकी बेटी टी. वीणा और उनकी आईटी (IT) कंपनी से जुड़े एक कथित रिश्वत घोटाले (pay-off scam) से जुड़ी इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी से सम्बद्ध है। इसके कारण न केवल सड़कों पर हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों के ‘इंडिया (INDIA) गठबंधन’ में भी दरारें भी उभर कर सामने आ गईं।
केरल और बेंगलुरु में 10 स्थानों पर चलाए गए एक बड़े और समन्वित अभियान के तहत, केंद्रीय एजेंसी ने कन्नूर और तिरुवनंतपुरम में विजयन के आवासों के साथ-साथ उनके दामाद व पूर्व पर्यटन मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास के कोझिकोड स्थित आवास और कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (CMRL) से जुड़े प्रमोटरों के घरों पर तलाशी ली।
इस अचानक हुई कार्रवाई का मुख्य कारण ठीक एक दिन पहले केरल उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) से मिली हरी झंडी थी, जिसने ईडी को उन आरोपों की जांच करने का रास्ता साफ कर दिया था, जिनमें कहा गया था कि सुश्री वीणा की अब बंद हो चुकी कंपनी ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ ने 2017 और 2021 के बीच बिना कोई वास्तविक सेवा दिए CMRL से भारी मासिक रिटेनर (फीस) हासिल की थी।
जब्ती और सड़कों पर हिंसा
श्री विजयन के तिरुवनंतपुरम स्थित आवास पर सात घंटे तक चली मैराथन तलाशी का अंत हंगामे के साथ हुआ। जैसे ही ईडी अधिकारी परिसर से बाहर निकले, उनके काफिले को एक आक्रोशित भीड़ ने हिंसक रूप से निशाना बनाया और उनके वाहनों में तोड़फोड़ की।
राजनीतिक आक्रोश के इस टकराव के बीच फंसी राज्य पुलिस ने बाद में माकपा (CPI-M) के पांच कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और केंद्रीय एजेंसी के कर्मियों पर हुए हमले में 12 अन्य को आरोपी बनाया। इस नाटकीय तनाव के बीच, कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने माकपा के एक स्थानीय कार्यालय की घेराबंदी कर दी, जिससे पार्टी नेताओं के साथ तीखी बहस हुई। पुलिस का दावा था कि हमलावरों ने इसी इमारत के भीतर शरण ली थी।
इस बीच, ईडी ने बड़ी वित्तीय सफलता की रिपोर्ट दी। एजेंसी के अनुसार, छापेमारी में सुश्री वीणा और CMRL के सहयोगियों से जुड़े आपत्तिजनक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और गुप्त निवेशों का एक बड़ा भंडार मिला है। त्वरित कार्रवाई करते हुए, जांचकर्ताओं ने इस अभियान के दौरान पहचान किए गए 242 बैंक खातों में जमा लगभग ₹18.36 करोड़ की राशि को फ्रीज (लेनदेन पर रोक) कर दिया।
राजनीतिक परिणाम: एक बिखरा हुआ विपक्ष
पूर्व मुख्यमंत्री के आवास के बाहर का दृश्य राजनीतिक संदेशों से पूरी तरह भरा हुआ था। उत्तेजित पार्टी कार्यकर्ताओं के जनसैलाब के सामने आते हुए, श्री विजयन ने अपनी मुट्ठी भींची—जो कि प्रतिरोध, अवज्ञा और मार्क्सवादी एकजुटता का एक सशक्त प्रतीक है।
हालांकि, उनके सबसे तीखे बाण न केवल केंद्र की सत्ताधारी भाजपा के लिए सुरक्षित थे, बल्कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी केंद्रित थे। राहुल गांधी के हालिया विधानसभा चुनाव अभियान के बयानों का संदर्भ देते हुए—जहाँ कांग्रेस नेता ने विजयन परिवार को गिरफ्तार करने में ईडी की “देरी” पर खुलेआम सवाल उठाए थे—राज्य विधानसभा में विपक्ष के वर्तमान नेता (पिनाराई विजयन) ने व्यंग्य करते हुए कहा, “मुझे उम्मीद है कि वह अब खुश होंगे।”
इस भावना का असर केरल की सीमाओं से परे भी तुरंत देखने को मिला। द्रमुक (DMK) प्रमुख एम.के. स्टालिन और आप (AAP) प्रमुख अरविंद केजरीवाल सहित इंडिया ब्लॉक के शीर्ष नेताओं ने सोशल मीडिया पर एकजुटता व्यक्त की और विपक्षी दिग्गजों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग (weaponisation) की कड़ी निंदा की।
‘यूडीएफ-भाजपा सांठगांठ’ के आरोप
माकपा (CPI-M) ने इस अवसर का उपयोग कांग्रेस पर तीखा जवाबी हमला करने के लिए किया। उन्होंने इंडिया ब्लॉक के मुख्य सहयोगी (कांग्रेस) पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक विरोधियों को दबाने की भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की रणनीति का मूक समर्थन कर रही है।
श्री विजयन के खिलाफ हुई छापेमारी की निंदा करने में कांग्रेस की स्पष्ट विफलता को रेखांकित करते हुए, माकपा के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने आरोप लगाया कि यह चुप्पी सार्वजनिक रूप से एक छिपी हुई “यूडीएफ-भाजपा सांठगांठ” (UDF-BJP nexus) को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। श्री गोविंदन ने जांचकर्ताओं को चुनौती देते हुए यह भी कहा कि ईडी ने यूडीएफ (UDF) के उन दो नेताओं को आसानी से नजरअंदाज कर दिया, जिन्हें कथित तौर पर CMRL से इसी तरह का फंड मिला था—एक ऐसा चयनात्मक अंधापन (selective blindness) जिसके बारे में उनका दावा है कि इसने हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और भाजपा दोनों को आपसी लाभ पहुँचाया।
