भारत में पहली बार ‘कैप्टागन’ ड्रग का भंडाफोड़
नई दिल्ली — नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक हाई-प्रोफाइल ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। ‘ऑपरेशन रेजपिल’ (Operation Ragepill) नाम से चलाए गए इस स्टिंग ऑपरेशन के दौरान भारत में पहली बार ‘कैप्टागन’ (Captagon) नामक अत्यधिक नशे वाली सिंथेटिक ड्रग की 227.7 किलोग्राम खेप जब्त की गई है। जब्त की गई इस खेप की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में अनुमानित कीमत ₹182 करोड़ है।
तस्करी का तरीका: ‘चालाकी से छिपाई गई ड्रग्स’
इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क ने भारत को एक ‘रणनीतिक ट्रांजिट हब’ के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की थी। एनसीबी की सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर दो प्रमुख स्थानों पर छापेमारी की गई:
- दिल्ली का सेफहाउस: 11 मई 2026 को नई दिल्ली के नेब सराय इलाके में एक घर पर छापा मारा गया, जहाँ से 31.5 किलो कैप्टागन टेबलेट बरामद हुईं। इन्हें एक ‘कमर्शियल चपाती-कटिंग मशीन’ के अंदर बड़ी चालाकी से छिपाकर रखा गया था। यह मशीन सऊदी अरब के जेद्दा भेजने के लिए पूरी तरह तैयार थी।
- मुंद्रा पोर्ट (गुजरात) इंटरसेप्शन: 14 मई 2026 को गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर एक और बड़ी कार्रवाई हुई। सीरिया से आए एक शिपिंग कंटेनर से 196.2 किलो कैप्टागन पाउडर मिला। इस ड्रग्स को ‘ऊन (Wool)’ की खेप बताकर फर्जी तरीके से घोषित किया गया था।
ओवरस्टे वीजा पर रह रहा सीरियाई नागरिक गिरफ्तार
इस तस्करी के सिलसिले में सीरियाई नागरिक अलाब्रस अहमद को हिरासत में लिया गया है। उस पर ‘नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस’ (NDPS) एक्ट, 1985 के तहत गंभीर आरोप तो हैं ही, साथ ही उसने आव्रजन (Immigration) नियमों का भी उल्लंघन किया है। अहमद 15 नवंबर 2024 को पर्यटक वीजा पर भारत आया था और 12 जनवरी 2025 को वीजा खत्म होने के बाद भी वह एक साल से अधिक समय से अवैध रूप से दिल्ली में रह रहा था ताकि सिंडिकेट की लॉजिस्टिक्स संभाल सके।
क्या है ‘कैप्टागन’ और यह खतरनाक क्यों है?
कैप्टागन ‘फेनेथिलिन’ (fenetylline) का ट्रेड नाम है, जो एम्फ़ैटेमिन (amphetamines) से जुड़ी एक एडिक्टिव साइकोस्टिमुलेंट ड्रग है। इसे अक्सर “जिहादी ड्रग” भी कहा जाता है, क्योंकि संघर्ष वाले क्षेत्रों में इसका नशा बहुत आम है।
- प्रभाव: यह शरीर में अत्यधिक ऊर्जा, हाइपर-अलर्टनेस और उत्साह पैदा करती है, साथ ही यह डर और नींद की कमी को खत्म करने में सक्षम है।
पश्चिम एशिया, उत्तरी अफ्रीका और यूरोप के बाद, अब भारत के तटों पर इसका आगमन अंतरराष्ट्रीय तस्करी के गलियारों के खतरनाक विस्तार की ओर इशारा करता है। एनसीबी अब सीमा शुल्क विभागों और अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर इस सिंडिकेट के वित्तीय लिंक और इसके मुख्य सरगनाओं का पता लगाने के लिए काम कर रही है।
