“टैरिफ डिप्लोमेसी” को कानूनी झटका: CIT ने ट्रंप के 10% अस्थायी टैरिफ को “अनधिकृत” घोषित किया
वाशिंगटन डी.सी. –यू.एस. कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड (CIT) ने शुक्रवार को फैसला सुनाया कि भारत सहित सभी अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 10% अस्थायी टैरिफ “कानून द्वारा अनधिकृत” थे।
इसे व्हाइट हाउस की व्यापार रणनीति को कमजोर करने वाले एक ऐतिहासिक फैसले में माना जा रहा है। यह फैसला भू-राजनीतिक और आर्थिक वार्ताओं में “लीवरेज” (दबाव के साधन) के रूप में व्यापक, सर्वव्यापी टैरिफ के प्रशासन के उपयोग के लिए एक बड़ा न्यायिक झटका है।
फैसला: वैधानिक अधिकार का अभाव
CIT ने पाया कि प्रशासन ने पर्याप्त विधायी समर्थन या मौजूदा व्यापार कानूनों के तहत वैध राष्ट्रीय सुरक्षा औचित्य के बिना 10% लेवी (जिसे अक्सर राजनयिक हलकों में “लिबरेशन डे टैरिफ” कहा जाता है) लागू करके अपनी कार्यकारी शक्तियों का उल्लंघन किया है।
- मिसाल: यह निर्णय एक शक्तिशाली कानूनी मिसाल कायम करता है जो राष्ट्रपति द्वारा विशुद्ध रूप से नीति-driven उद्देश्यों के लिए सहयोगियों और भागीदारों पर एकतरफा तरीके से व्यापक टैरिफ लगाने की क्षमता को सीमित करता है।
- “एक और प्रहार”: यह फैसला गहन न्यायिक जांच के दौर के बाद आया है; मई 2026 की रिपोर्टों ने संकेत दिया था कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इन विशिष्ट टैरिफ के प्रति संदेह व्यक्त किया था, जिससे इनके भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई थी।
वैश्विक और भारतीय निर्यातकों पर प्रभाव
यद्यपि यह फैसला मुक्त व्यापार समर्थकों के लिए एक नैतिक और कानूनी जीत है, CIT ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी (Caveat) भी जोड़ी है: यह निर्णय तत्काल वित्तीय राहत में नहीं बदलता है।
- तत्काल रिफंड नहीं: भारत, यूरोपीय संघ और अन्य देशों के निर्यातकों को 10% शुल्क से तत्काल राहत नहीं मिलेगी, और न ही पहले से एकत्र किए गए अरबों डॉलर के रिफंड के लिए कोई पुख्ता समयसीमा तय की गई है।
- लंबित अपील: उम्मीद है कि प्रशासन CIT के इस फैसले को फेडरल सर्किट में चुनौती देगा, जिससे ये टैरिफ संभवतः कई महीनों तक “कानूनी अधर” (Legal Limbo) में बने रह सकते हैं।
- व्यापार सौदे में गतिरोध: यह फैसला भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) में जटिलता की एक और परत जोड़ देता है। जैसा कि हाल ही में सचिव मार्को रुबियो की दिल्ली यात्रा के दौरान देखा गया, इन टैरिफ से जुड़ी कानूनी अस्थिरता के कारण ही BTA को अंतिम रूप देने का काम रुका हुआ है।
ट्रंप प्रशासन के लिए रणनीतिक निहितार्थ
यह फैसला व्यापार पर “ट्रंप सिद्धांत” (Trump Doctrine) के मूल प्रहार करता है, जो भागीदारों को रियायतें देने के लिए मजबूर करने हेतु टैरिफ की धमकी पर निर्भर करता है।
चूंकि CIT ने इन उपकरणों को “अनधिकृत” करार दिया है, इसलिए भारत और जापान जैसे व्यापारिक साझेदार BTA या ‘क्वाड’ (Quad) वार्ताओं में बड़ी रियायतें देने के लिए कम प्रेरित महसूस कर सकते हैं। उन्हें यह उम्मीद होगी कि उच्च अदालतें अंततः इन टैरिफ को स्थायी रूप से खारिज कर देंगी।
संदर्भ: “लिबरेशन डे” की पृष्ठभूमि
ये टैरिफ 2025 की शुरुआत में पेश किए गए संरक्षणवादी उपायों के एक व्यापक समूह का हिस्सा थे। इनका अमान्य होना एक बेहद संवेदनशील समय पर आया है, क्योंकि अमेरिका आयातित कच्चे माल और उपभोक्ता वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के कारण भारी घरेलू विरोध का सामना कर रहा है, जिसका सीधा संबंध आलोचक इन अनधिकृत शुल्कों से जोड़ते हैं।
