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भारत :अवैध प्रवासियों के प्रत्यावर्तन संबंधी लंबित मामले बांग्लादेश के साथ “मुख्य मुद्दा”

नई दिल्ली/ढाका – भारत और बांग्लादेश के बीच एक बड़ा राजनयिक विवाद छिड़ गया है, जिसमें नई दिल्ली ने अवैध प्रवासियों के प्रत्यावर्तन (Repatriation) को उनके द्विपक्षीय संबंधों का “मुख्य मुद्दा” करार दिया है। यह तनाव हाल के राज्य विधानसभा चुनावों के परिणामों और सीमा पर “पुश-बैक” (वापस धकेलने) के संबंध में विवादास्पद टिप्पणियों के कारण हुई तीखी बयानबाजी के बाद पैदा हुआ है।

‘द हिंदू’ द्वारा देखे गए एक नोट वर्बेल’ (Note Verbale) के अनुसार, भारत ने सितंबर 2020 से अब तक ढाका को 1,137 राजनयिक नोट और 456 समेकित अनुस्मारक भेजे हैं, फिर भी अधिकारियों का दावा है कि अब तक कोई “कार्रवाई योग्य प्रतिक्रिया” (actionable response) नहीं मिली है।

प्रत्यावर्तन का गतिरोध

विदेश मंत्रालय (MEA) ने राष्ट्रीयता सत्यापन (nationality verification) प्रक्रिया में सहयोग की निरंतर कमी पर प्रकाश डाला है, जो प्रत्यावर्तन के लिए एक अनिवार्य शर्त है।

  • लंबित मामले: वर्तमान में, संदिग्ध अवैध प्रवासियों के 2,862 मामले बांग्लादेशी अधिकारियों द्वारा राष्ट्रीयता सत्यापन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
  • अवधि: इनमें से कई सत्यापन अनुरोध पांच वर्षों से अधिक समय से लंबित हैं।
  • कानूनी स्थिति: भारत का रुख है कि प्रत्यावर्तन के सभी उपाय घरेलू कानूनों और स्थापित द्विपक्षीय तंत्रों के अनुसार किए जाते हैं।

उत्प्रेरक: राजनीतिक संबंधी टिप्पणियाँ

तनाव का तात्कालिक कारण 26 अप्रैल को हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा की गई टिप्पणियाँ थीं। सरमा ने दावा किया कि उनके प्रशासन ने अवैध प्रवासियों के समूहों को सीमा के गैर-गश्त वाले हिस्सों से सफलतापूर्वक “वापस धकेल” (pushed back) दिया है।

  • ढाका का विरोध: बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने 30 अप्रैल को कार्यवाहक भारतीय दूत पवन बढ़े को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। उन्होंने इन टिप्पणियों को “अपमानजनक” और द्विपक्षीय संबंधों के लिए “प्रतिकूल” बताया।
  • भारतीय जवाब: नई दिल्ली ने जवाब दिया कि ऐसी टिप्पणियों को “मुख्य मुद्दे” के चश्मे से देखा जाना चाहिए—यानी कानूनी प्रत्यावर्तन प्रक्रियाओं में भारी बैकलॉग, जिसके कारण सख्त सीमा प्रबंधन आवश्यक हो जाता है।

चुनाव बाद की भू-राजनीति

यह राजनयिक गतिरोध पश्चिम बंगाल और असम चुनावों में भाजपा की जीत की पृष्ठभूमि में सामने आ रहा है, जिसने प्रवासन नीतियों को लेकर ढाका में संवेदनशीलता बढ़ा दी है।

हितधारकपक्ष/रुख
रणधीर जायसवाल (विदेश मंत्रालय)प्रत्यावर्तन मौलिक मुद्दा है; इसके लिए ढाका से तत्काल सहयोग की आवश्यकता है।
खलीलुर रहमान (बांग्लादेश विदेश मंत्री)यदि अवैध “पुश-इन” (भीतर धकेलना) होता है, तो बांग्लादेश “पर्याप्त उपाय” करेगा।
सलाहुद्दीन अहमद (बांग्लादेश गृह मंत्री)चुनाव परिणामों के बाद किसी भी एकपक्षीय सीमा कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी।

रणनीतिक निहितार्थ

चूँकि बांग्लादेश वर्तमान में भी “अस्थिरता” के दौर से गुजर रहा हैं, मुख्य ध्यान इस बात पर है कि क्या राजनयिक तंत्र बयानबाजी से आगे बढ़कर सत्यापन मामलों के बैकलॉग को हल कर पाएगा। जहाँ नई दिल्ली कानून के शासन और मौजूदा संधियों पर जोर देती है, वहीं ढाका अपनी संप्रभुता की रक्षा और एकपक्षीय सीमा निर्वासन को रोकने के बारे में मुखर हो रहा है।

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