“प्रोजेक्ट फ्रीडम” और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौसैनिक झड़पें
अबू धाबी / मस्कट — “प्रोजेक्ट फ्रीडम” की शुरुआत के दौरान अमेरिकी सेना और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) की इकाइयों के बीच हुई भिड़ंत ने फारस की खाड़ी में अप्रैल के संघर्ष विराम के बाद से अब तक का सबसे बड़ा तनाव पैदा कर दिया है। दो महीने से जारी समुद्री नाकेबंदी को तोड़ने के उद्देश्य से चलाए गए इस ऑपरेशन ने पूरे क्षेत्र में जवाबी हमलों को जन्म दिया है, जिसमें अप्रैल की शुरुआत के बाद से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर हुआ पहला सीधा हमला भी शामिल है।
नौसैनिक संघर्ष: प्रोजेक्ट फ्रीडम
सोमवार, 4 मई, 2026 को अमेरिकी सेना ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में फंसे व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए एक उच्च-जोखिम वाला मिशन शुरू किया।
- संघर्ष: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि ईरानी बलों ने नागरिक जहाजों को परेशान करने के लिए क्रूज मिसाइलों, ड्रोनों और स्पीडबोट्स का इस्तेमाल किया। जवाब में अमेरिकी नौसेना के हेलीकॉप्टरों ने ईरान की छह छोटी नावों को डुबो दिया।
- परिणाम: एडमिरल ब्रैड कूपर ने पुष्टि की कि अमेरिका के ध्वज वाले दो व्यापारिक जहाज सफलतापूर्वक जलडमरूमध्य को पार कर गए।
- खंडन: तेहरान ने अमेरिकी दावों को “बेबुनियाद” और “भ्रम” करार दिया है। ईरान ने वाणिज्यिक जहाजों के पार होने और अपने किसी भी जहाज के नुकसान से इनकार किया है।
क्षेत्रीय प्रभाव: UAE और ओमान पर हमले
IRGC की जवाबी कार्रवाई पानी के बाहर भी फैली, जिसमें मित्र देशों के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया।
- UAE (फुजैराह): ईरानी ड्रोन हमले ने फुजैराह में एक तेल सुविधा को निशाना बनाया, जिससे वहां भीषण आग लग गई। अबू धाबी में भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि इस विस्फोट में तीन भारतीय नागरिक घायल हुए हैं और उनका इलाज चल रहा है।
- ओमान: जलडमरूमध्य के पास एक आवासीय इमारत को निशाना बनाया गया, जिससे दो विदेशी कर्मचारी घायल हो गए।
- समुद्री नुकसान: ब्रिटिश सेना ने मिसाइल हमलों के बाद UAE के तट पर दो अतिरिक्त मालवाहक जहाजों में आग लगने की सूचना दी है।
“दोहरी नाकेबंदी” और विफल युद्धविराम
वर्तमान संकट उस “दोहरी नाकेबंदी” (dual blockade) से उपजा है जिसने फरवरी 2026 के अंत से वैश्विक ऊर्जा बाजारों को पंगु बना दिया है:
- ईरानी नाकेबंदी: तेहरान ने अधिकांश यातायात के लिए जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, और हाल ही में प्रति जहाज $10 लाख से अधिक का “टोल” (शुल्क) मांगना शुरू किया है।
- अमेरिकी नाकेबंदी: इस्लामाबाद में मध्यस्थता वार्ता विफल होने के बाद, वाशिंगटन ने 13 अप्रैल से ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी कर रखी है।
प्रोजेक्ट फ्रीडम: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नए सैन्य एस्कॉर्ट (सुरक्षा घेरे) को एक “मानवीय प्रयास” बताया है, जिसका उद्देश्य उन 20,000 नाविकों को बचाना है जो भोजन और पानी की घटती आपूर्ति के साथ खाड़ी में फंसे सैकड़ों जहाजों पर अटके हुए हैं।
भारत पर प्रभाव: ऊर्जा और मानवीय क्षति
इस कॉरिडोर के माध्यम से कच्चे तेल और यूरिया के प्रमुख आयातक के रूप में, भारत इस अस्थिरता से गहराई से प्रभावित है:
- मानवीय: भारतीय नाविकों और श्रमिकों के घायल होने से इस संघर्ष में भारत को प्रत्यक्ष मानवीय क्षति हुई है। नई दिल्ली ने नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की “अस्वीकार्य” कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।
- आर्थिक: हॉर्मुज़ मार्ग बंद होने के कारण भारत को लगभग दोगुनी कीमत पर रिकॉर्ड मात्रा में यूरिया आयात करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
