साइबर फ्रॉड पर तमिलनाडु पुलिस का बड़ा एक्शन: शुरू की ‘e-Zero FIR’ व्यवस्था
चेन्नई: साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने और ठगी गई रकम को जल्द से जल्द रिकवर करने के लिए तमिलनाडु सरकार ने एक बड़ी और आधुनिक तकनीकी पहल की है। राज्य सरकार ने नेशनल साइबरक्राइम हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से रिपोर्ट किए जाने वाले मामलों के लिए ‘e-Zero FIR’ सिस्टम लागू कर दिया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के देशव्यापी प्रयासों के तहत शुरू की गई इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराधियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई शुरू करना और जनता के पैसे को सुरक्षित करना है।
कैसे काम करेगा ‘e-Zero FIR’ सिस्टम?
पुलिस महानिदेशक (DGP) महेश कुमार अग्रवाल ने इस नई प्रणाली के डिजिटल ढांचे के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत हेल्पलाइन और पुलिस के डिजिटल नेटवर्क को आपस में पूरी तरह इंटीग्रेट कर दिया गया है:
- ₹1 लाख की सीमा: यदि 1930 हेल्पलाइन पर रिपोर्ट की गई साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की राशि 1 लाख रुपये से अधिक है, तो यह शिकायत स्वतः ही देशव्यापी डिजिटल पुलिस पोर्टल CCTNS (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स) से जुड़ जाएगी।
- ऑटोमैटिक रजिस्ट्रेशन: पोर्टल से जुड़ते ही बिना किसी मानवीय देरी के तुरंत एक ‘e-Zero FIR’ दर्ज हो जाएगी।
- अधिकार क्षेत्र का झंझट खत्म: इस e-Zero FIR को तुरंत संबंधित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में इलेक्ट्रॉनिक रूप से ट्रांसफर कर दिया जाएगा, जिसे बाद में उस पुलिस स्टेशन द्वारा नियमित FIR में बदल दिया जाएगा जिसके क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र में वह मामला आता है।
3 दिनों के भीतर वेरिफिकेशन है जरूरी (BNSS, 2023)
इस डिजिटल व्यवस्था में कानूनी वैधता बनाए रखने के लिए नए कानूनों के प्रावधानों को कड़ाई से लागू किया गया है:
- SMS अलर्ट: जैसे ही सिस्टम पर e-Zero FIR दर्ज होगी, शिकायतकर्ता के मोबाइल पर तुरंत एक SMS अलर्ट भेजा जाएगा।
- थाने का दौरा: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173 के तहत, शिकायतकर्ता को अपनी इलेक्ट्रॉनिक शिकायत को सत्यापित (Authenticate) करने और औपचारिक पंजीकरण प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 3 दिनों के भीतर संबंधित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन का दौरा करना होगा।
‘गोल्डन ऑवर’ में रिकवरी और डिजिटल सबूतों का संरक्षण
यह प्रणाली इस सिद्धांत पर काम करती है कि साइबर अपराध में समय ही सबसे बड़ा हथियार है। घटना के तुरंत बाद का समय यानी ‘गोल्डन ऑवर’ ठगी गई रकम को वापस पाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है।
“1930 हेल्पलाइन को CCTNS से जोड़ने के बाद अब डेटा एंट्री को दोबारा करने की जरूरत खत्म हो गई है। इससे बिना किसी देरी के केस दर्ज हो सकेगा। यह सिस्टम क्षेत्राधिकार तय होने से पहले ही कानूनी कार्रवाई शुरू करने की अनुमति देता है, जिससे क्रिटिकल ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन को तुरंत फ्रीज करने, डिजिटल सबूतों को नष्ट होने से बचाने और पैसे की तेजी से रिकवरी करने में मदद मिलेगी।” — महेश कुमार अग्रवाल, पुलिस महानिदेशक (DGP)
तमिलनाडु पुलिस ने आम जनता को सचेत करते हुए अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के साइबर वित्तीय फ्रॉड का शिकार होने पर बिना एक पल गंवाए तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें, ताकि इस नई ‘e-Zero FIR’ व्यवस्था का लाभ उठाकर अपराधियों को ब्लॉक किया जा सके।
