AI में वैश्विक नेतृत्व की ओर चीन का बड़ा कदम: शी जिनपिंग ने ‘WAICO’ का किया गठन
शंघाई/बीजिंग: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में वैश्विक महाशक्ति बनने की अपनी महत्वाकांक्षा को स्पष्ट करते हुए चीन ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अभियान का शंघाई से शंखनाद किया है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मुख्य रूप से ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) और विकासशील देशों को केंद्रित करते हुए एक नई वैश्विक AI गवर्नेंस पहल का अनावरण किया है।
इस रणनीति के तहत चीन के साथ एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के 29 अन्य देशों ने मिलकर शंघाई में ‘वर्ल्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन’ (WAICO) की स्थापना की है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इसे विकासशील देशों की आवाज़ बुलंद करने और AI विकास को गति देने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया है।
भारत इस शंघाई शिखर सम्मेलन में मौजूद था और उसने वहां अपना संयुक्त सचिव स्तर का प्रतिनिधिमंडल भी भेजा था। इसके बावजूद, भारत पांच संस्थापक ब्रिक्स देशों में अकेला ऐसा देश है, जिसने खुद को चीन के नेतृत्व वाले इस नए संगठन (WAICO) से पूरी तरह बाहर रखा है।
ग्लोबल साउथ के लिए चीन का ‘मेगा प्लान’
शंघाई में आयोजित AI गवर्नेंस शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने विकासशील देशों के लिए कई बड़े वादों की घोषणा की:
- 5,000 ट्रेनिंग अवसर: चीन अगले पांच वर्षों में विकासशील देशों को AI प्रशिक्षण और सेमिनार कार्यक्रमों में 5,000 अवसर प्रदान करेगा।
- संयुक्त AI सहयोग केंद्र: आसियान (ASEAN), अरब लीग, अफ्रीकी संघ (AU), लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई राज्यों के समुदाय (CELAC), शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और ब्रिक्स (BRICS) देशों के साथ मिलकर विशेष AI अनुप्रयोग सहयोग केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
पश्चिमी AI मॉडल्स पर अविश्वास: सुरक्षा और विचारधारा की जंग
इस पूरी कवायद के पीछे बीजिंग की सबसे बड़ी चिंता पश्चिमी देशों के AI मॉडल्स (जैसे OpenAI का ChatGPT और Anthropic का Claude) पर निर्भरता को कम करना है। चीन का मानना है कि पश्चिमी तकनीकी पर पूरी तरह निर्भर रहने से न केवल सुरक्षा से समझौता होता है, बल्कि इसके जरिए पश्चिमी मूल्यों की घुसपैठ भी होती है जिससे देशों की संप्रभुता प्रभावित हो सकती है।
शी जिनपिंग ने बिना किसी देश का नाम लिए अमेरिकी नीतियों पर निशाना साधते हुए कहा कि देशों को AI के क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा को जरूरत से ज्यादा खींचने और एक देश की सुरक्षा को दूसरे देशों से ऊपर रखने का विरोध करना चाहिए।
चीनी कंपनियों का बढ़ता दबदबा
WAICO के गठन से ठीक एक दिन पहले, चीनी AI फर्म मूनशॉट (Moonshot) ने अपना नवीनतम ‘Kimi K3’ मॉडल लॉन्च कर पश्चिमी विश्लेषकों को चौंका दिया है। मूनशॉट और डीपसीक (DeepSeek) जैसी चीनी कंपनियां बड़े पैमाने पर ओपन-सोर्स मॉडल पेश कर रही हैं। बीजिंग का मानना है कि यह तकनीक विकासशील देशों को आकर्षित करने में चीन को एक बड़ा रणनीतिक लाभ देगी।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर देते हुए शी जिनपिंग ने कहा:
“हमें सभ्यताओं के बगीचे की बहुत देखभाल करनी चाहिए ताकि हर संस्कृति की सुंदरता को सराहा और साझा किया जा सके। चीन में एक कहावत है—’एक अकेला धागा संगीत पैदा नहीं कर सकता और एक अकेला पेड़ जंगल नहीं बना सकता।’ AI का विकास किसी एक देश का एकल प्रदर्शन (solo performance) नहीं होना चाहिए, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग की एक शानदार जुगलबंदी (symphony) होनी चाहिए।”
