संयुक्त राष्ट्र और एल नीनो की तैयारी: 202 मिलियन डॉलर की मांग
संयुक्त राष्ट्र की दो सबसे बड़ी खाद्य एजेंसियों—खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP)—ने एक आसन्न वैश्विक संकट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को दोनों एजेंसियों ने मौसम के बदलते मिजाज ‘एल नीनो’ (El Niño) के विनाशकारी प्रभावों से दुनिया को बचाने के लिए $202 मिलियन (202 मिलियन डॉलर) की आपातकालीन अपील जारी की है।
यह कोई सामान्य राहत पैकेज नहीं है, बल्कि एक सुरक्षा कवच है जिसे संकट आने से पहले ही तैयार किया जा रहा है।
संकट का दायरा: आंकड़े क्या कहते हैं?
एल नीनो का असर किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह वैश्विक मौसम चक्र को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त करने की क्षमता रखता है। इस फंडिंग का सीधा उद्देश्य निम्नलिखित है:
- लक्षित आबादी: विश्व के सबसे असुरक्षित क्षेत्रों के लगभग 8.8 मिलियन (88 लाख) लोग।
- भौगोलिक कवरेज: इसके तहत 22 उच्च जोखिम वाले देशों को कवर किया जाएगा जो इस मौसमी बदलाव की सीधी मार झेलने वाले हैं।
- बहु-आयामी खतरे (Multi-Hazard Risks): FAO और WFP के अनुसार, एल नीनो के कारण विभिन्न क्षेत्रों में अप्रत्याशित सूखा (drought), विनाशकारी बाढ़ (flood) और तीव्र तूफानों (storms) का खतरा अत्यधिक बढ़ सकता है।
संपादक की नजर से: राहत से पहले रोकथाम (Anticipatory Action)
पारंपरिक रूप से, वैश्विक समुदाय किसी आपदा के आने के बाद राहत सामग्री लेकर पहुंचता है। लेकिन यह अपील कूटनीति और आपदा प्रबंधन में एक बड़े बदलाव को दर्शाती है—प्रतिक्रियात्मक (Reactive) के बजाय एहतियाती (Proactive) कदम उठाना।
$202 मिलियन की यह राशि पहली नजर में बड़ी लग सकती है, लेकिन जब एल नीनो जैसी आपदाएं पूरी की पूरी फसलों को तबाह कर देती हैं और भुखमरी जैसी स्थिति पैदा करती हैं, तब आर्थिक और मानवीय नुकसान इस बजट से कई गुना ज्यादा होता है। 22 उच्च जोखिम वाले देशों में समय रहते बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और किसानों को जागरूक करना ही आने वाले मानवीय संकट को टालने का एकमात्र रास्ता है।
