एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन बने 27वें नौसेना प्रमुख
एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने आधिकारिक तौर पर रविवार को भारतीय नौसेना के 27वें प्रमुख (CNS) के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। उन्होंने इस समुद्री बल की कमान एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी से ली है, जो 41 वर्षों से अधिक के शानदार करियर के बाद सेवानिवृत्त (रिटायर) हुए हैं। नौसेना में नेतृत्व का यह बदलाव एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर हुआ है, जब भारत का समुद्री क्षेत्र अभूतपूर्व रणनीतिक बदलावों का सामना कर रहा है।
‘चुनौतीपूर्ण और अनिश्चित’ माहौल में मुस्तैद रहने का संकल्प
कमान संभालने के तुरंत बाद, एडमिरल स्वामीनाथन ने पत्रकारों को संबोधित किया और अपनी नई भूमिका के भारी भू-राजनीतिक (geopolitical) महत्व को सीधे तौर पर स्वीकार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके नेतृत्व में नौसेना भारत के आर्थिक और रणनीतिक जलक्षेत्र की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से सक्रिय और मुस्तैद रहेगी।
नया ब्लूप्रिंट: आधुनिक तकनीक और युद्ध तैयारी
नौसेना के लिए अपना तात्कालिक ब्लूप्रिंट (योजना) पेश करते हुए, नए नौसेना प्रमुख ने संकेत दिया कि आधुनिकरण की रफ्तार को किसी भी कीमत पर धीमा नहीं होने दिया जाएगा। उनका मुख्य ध्यान बेड़े को आधुनिक और असममित युद्ध (asymmetric warfare) के लिए तैयार करने पर केंद्रित है:
- धार को पैना करना: सभी नौसेना कमानों में शीर्ष स्तर की परिचालन तैयारी (operational readiness) और अधिकतम युद्ध प्रभावशीलता को बनाए रखना।
- तकनीकी तेजी: क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों से आगे रहने के लिए उभरती और विशिष्ट (niche) तकनीकों को बेड़े में शामिल करने की प्रक्रिया में तेजी लाना।
- विकास को सुदृढ़ करना: चल रहे स्वदेशी युद्धपोत निर्माण और क्षमता वृद्धि कार्यक्रमों की गति को लगातार बनाए रखना।
नौसेना प्रमुख ने आगे कहा, “भारतीय नौसेना क्षमता वृद्धि और आधुनिकीकरण के मार्ग पर अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है। मेरा यह प्रयास रहेगा कि विकास की इस गति को बनाए रखा जाए, चल रहे कार्यक्रमों को मजबूत किया जाए और हमारी परिचालन क्षमताओं को और अधिक धार दी जाए।”
इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के विशेषज्ञ
एडमिरल स्वामीनाथन तकनीक-संचालित नौसैनिक भविष्य के लिए विशिष्ट रूप से सक्षम हैं। 1 जुलाई, 1987 को भारतीय नौसेना में शामिल हुए एडमिरल स्वामीनाथन को संचार (Communication) और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (इलेक्ट्रॉनिक युद्ध) का एक बेहद प्रतिष्ठित विशेषज्ञ माना जाता है।
लगभग चार दशकों के अपने शानदार करियर के दौरान, उन्होंने नौसेना के कई सबसे महत्वपूर्ण परिचालन पदों की कमान संभाली है, जिनमें शामिल हैं:
- पश्चिमी बेड़े (Western Fleet) के कमांडर
- नौसेना स्टाफ के उप-प्रमुख (Vice Chief of Naval Staff)
- पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (नौसेना प्रमुख बनने से पहले उनका अंतिम पद)
आज जब हिंद महासागर तेजी से एक व्यस्त और प्रतिस्पर्धी क्षेत्र बनता जा रहा है, ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और फ्लीट ऑपरेशंस (बेड़े के संचालन) में नए नौसेना प्रमुख का यह विशिष्ट अनुभव भारत की समुद्री शक्ति और प्रभाव को बढ़ाने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
