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भारत की आंतरिक सुरक्षा रणनीति में ‘प्रहार’ का आगाज़; अब आतंकियों के ‘इकोसिस्टम’ पर होगा सीधा प्रहार

भारत की आंतरिक सुरक्षा के गलियारों में पिछले कई दशकों से जिस एक ‘व्यापक डॉक्ट्रिन’ की कमी महसूस की जा रही थी, वह अब धरातल पर आ गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश की पहली एकीकृत आतंकवाद-विरोधी नीति ‘प्रहार’ (PRAHAAR) को सार्वजनिक कर दिया है। नॉर्थ ब्लॉक (North Block) के गलियारों में पिछले दो दशकों से सुरक्षा मामलों को कवर करने के अनुभव से मैं यह कह सकता हूँ कि यह दस्तावेज़ महज़ एक सरकारी नीति नहीं, बल्कि एक ‘युद्ध घोष’ है।

यह नीति स्पष्ट करती है कि भारत अब केवल सीमा पर घुसपैठ का इंतज़ार नहीं करेगा, बल्कि उस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को जड़ से उखाड़ेगा जो आतंक की नर्सरी को खाद-पानी देता है।

बहुआयामी चुनौतियां और ‘चौथा मोर्चा’

‘प्रहार’ नीति की सबसे बड़ी खासियत इसका व्यापक दायरा है। गृह मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि आज खतरा सिर्फ थल, जल और नभ तक सीमित नहीं है। अब एक ‘चौथा मोर्चा’ खुल चुका है—साइबर स्पेस। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि राष्ट्र-राज्य (Nation-states) और अपराधी हैकर्स हमारे पावर ग्रिड, रेलवे, विमानन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष संस्थानों जैसे ‘क्राउन जूवेल्स’ (Crown Jewels) को निशाना बना रहे हैं।

यह पहली बार है जब किसी आधिकारिक नीति में ‘हाइब्रिड वारफेयर’ की चुनौती को इतने विस्तार से स्वीकार किया गया है। अब सुरक्षा का मतलब सिर्फ राइफल तानना नहीं, बल्कि डिजिटल दीवारों को अभेद्य बनाना भी है।

‘इकोसिस्टम’ पर वार: न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी

गृह मंत्री अमित शाह के ‘जीरो टॉलरेंस’ विजन की छाप इस नीति के हर पन्ने पर दिखती है। अब रणनीति केवल बंदूक उठाने वाले आतंकी तक सीमित नहीं है। ‘प्रहार’ का लक्ष्य उस ‘सफेदपोश’ नेटवर्क को ध्वस्त करना है जो आतंकियों को फंडिंग, हथियार और पनाह मुहैया कराता है।

नीति में ‘आतंकी-अपराध सांठगांठ’ (Terror-Crime Nexus) का विशेष उल्लेख है। यह कड़वी सच्चाई है कि अल-कायदा और ISIS जैसे वैश्विक संगठन अब स्थानीय अपराधी गिरोहों का इस्तेमाल रसद और भर्ती के लिए कर रहे हैं। ‘प्रहार’ का मकसद इन रसद कड़ियों को तोड़कर आतंकवाद को ‘आर्थिक और रणनीतिक’ रूप से दिवालिया बनाना है।

तकनीक बनाम आतंक: ड्रोन और डार्क वेब

रक्षा विशेषज्ञों के लिए इस नीति का सबसे दिलचस्प हिस्सा ‘तकनीकी विषमता’ (Technological Asymmetry) से निपटना है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर में ड्रोन के जरिए गिराए जा रहे हथियार और ड्रग्स अब एक बड़ा सिरदर्द बन चुके हैं। ‘प्रहार’ नीति CBRNED (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु, विस्फोटक और डिजिटल) खतरों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और इंटरसेप्शन टूल्स में भारी निवेश की बात करती है। साथ ही, क्रिप्टो-वॉलेट और डार्क वेब के जरिए होने वाले गुमनाम लेनदेन पर नकेल कसने के लिए डिजिटल फॉरेंसिक को धार दी जाएगी।

एक देश, एक सुरक्षा ढांचा

इस नीति का सबसे महत्वाकांक्षी—और शायद सबसे चुनौतीपूर्ण—हिस्सा है: सभी राज्यों में एक समान आतंकवाद-विरोधी संरचना। भारत जैसे संघीय ढांचे में, जहाँ ‘पुलिस’ राज्य का विषय है, प्रक्रियाओं और एसओपी (SOPs) का मानकीकरण करना एक हिमालयी कार्य है। लेकिन 2025 की ‘पहलगाम घटना’ के बाद NIA जिस तरह सक्रिय हुई है, उससे साफ है कि अब राज्यों और केंद्र के बीच ‘इंटेलिजेंस गैप’ के लिए कोई जगह नहीं बची है।

निष्कर्ष: ‘वेट एंड वॉच’ का अंत

‘प्रहार’ हार्ड पावर और सॉफ्ट पावर का एक अनूठा मिश्रण है। जहाँ यह ड्रोन और मिसाइल सुरक्षा की बात करती है, वहीं कट्टरपंथ को रोकने के लिए सामुदायिक नेताओं और उदारवादी प्रचारकों की भूमिका को भी रेखांकित करती है।

नई दिल्ली से सीधा संदेश है: ‘प्रतीक्षा और प्रतिक्रिया’ (Wait and Watch) का दौर बीत चुका है। भारत ने अपने लक्ष्य तय कर लिए हैं, और ‘प्रहार’ के जरिए अब वह आतंक की जड़ों पर सीधा वार करने को तैयार है।

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